Home   Projects   Learn Game making for Free

Learn Game making for Free

भूतनाथ, इक्कीस भाग व सात खण्डों में, ‘चन्द्रकान्ता’ व ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ की ही परम्परा और श्रृंखला का, बाबू देवकीनन्दन खत्री विरचित एक अत्यन्त लोकप्रिय और बहुचर्चित प्रसिद्ध उपन्यास है।

boothnath3.jpg
boothnath2.jpg
boothnath.jpg
इस अद्भुत रोमांचक कहानी पर आधारित 15 स्टेज का गेम प्लान किया जा रहा है, जो हाई ग्राफ़िक्स सिमुलेशन से भरपूर होगा। समय समय पर गेम से संबंधित जानकारी ब्लाग पर प्रकाशित की जाएगी
इस रोमांचक गेम पर काम करने के लिये गेम आर्टिस्टों की आवश्यकता है –
1. इस गेम को बिना प्रोग्रामर की सहायता के बनाया जाएगा।
2. यह गेम पीसी व एन्ड्रायड बेस होगा।
3. केवल 4 महीने में गेम को अल्फ़ा टेस्टिंग के लिये उपलब्ध कराना होगा।
4. माडलिंग, टेक्चरिंग, एनीमेशन, मोशन कैप्चर आदि सभी कार्यों के लिये सहयोगियों की आवश्यकता है।
फ़्रेशर्स / सीखने के इक्छुक (जो भी भाई बहिन इस गेम को बनाने में हिस्सा लेना चाहते हैं,)कृप्या निम्न फ़ार्म भरें।
BHOOTNATH

Your Name (required)

Your Email (required)

Valid Mobile No. (Bharat Only)

Experience level:
BeginnerIntermediteAdvanced

‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ में ही बाबू देवकीनन्दन खत्री के अद्भुत पात्र भूतनाथ (गदाधर सिंह) ने अपनी जीवनी (जीवन-कथा) प्रस्तुत करने का संकल्प किया था। यह संकल्प वस्तुतः लेखक का ही एक संकेत था कि इसके बाद ‘भूतनाथ’ नामक बृहत् उपन्यास की रचना होगी। देवकीनन्दन खत्री की अद्भुत कल्पना-शक्ति को शत-शत नमन है। लाखों करोड़ों पाठकों का यह उपन्यास कंठहार बना हुआ है। जब यह कहा जाता है कि ‘चन्द्रकान्ता’ और ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ उपन्यासों को पढ़ने के लिए लाखों लोगों ने हिन्दी भाषा सीखी तो इस कथन में ‘भूतनाथ’ भी स्वतः सम्मिलित हो जाता है क्योंकि ‘भूतनाथ’ उसी तिलिस्मी और ऐयारी उपन्यास परम्परा ही नहीं, उसी श्रृंखला का प्रतिनिधि उपन्यास है। कल्पना की अद्भुत उड़ान और कथारस की मार्मिकता इसे हिन्दी साहित्य की विशिष्ट रचना सिद्ध करती है। मनोरंजन का मुख्य उद्देश्य होते हुए भी इसमें बुराई और असत् पर अच्छाई और सत् की विजय का शाश्वत विधान ऐसा है जो इसे एपिक नॉवल (Epic Novel) यानी महाकाव्यात्मक उपन्यासों की कोटि में लाता है।
Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*